पटना। मोदीजी और अमित शाह ने बिहार के चुनावों में भौकाल काटने के लिए घुसपैठिया, बांग्लादेशी और रोहिंग्या का नैरेटिव सेट करने की कोशिश की। लेकिन उनका ये नैरेटिव मतदाताओं के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में भी जमीन पर लोटते नज़र आए हैं। बिहार के लिए जारी विशुद्ध अंतिम मतदाता सूची में से 47 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने के बाद 7.4 करोड़ वोटर रह गए हैं। उनमें बात अगर घुसपैठिए, बांग्लादेशी या फिर रोहिंग्या की करें तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि चुनाव आयोग को वोटरों के शुद्धिकरण के बाद बिहार में कुल 3 विदेशी नागरिक मिले हैं। वो भी उनके विदेशी होने की अंतिम पुष्टि अबतक नहीं हो पाई है। यानी 11 साल से केंद्र और 20 साल से बिहार की सत्ता में बने रहने के बावजूद मोदीजी और अमित शाह ने बिहार के वोटरों को घुसपैठियों के नाम पर बरगलाने की कोशिश की है। दरअसल वो इस बात को गोल कर जाते हैं कि देश में अगर एक भी घुसपैठिया है तो उसे रोकने का जिम्मेदारी मोदीजी और अमित शाह की ही है। हां, इसी बहाने लाखों अल्पसंख्यकों, दलितों, पिछड़ों, अति-पिछड़ों और गरीब महिलाओं के वोट चुनाव आयोग की मिलीभगत से जरूर काट दिए गए हैं। वैसे बिहार में पुरानी कहावत है कि यहां की धरती पर अच्छे-अच्छे उस्ताद भी अपनी उस्तादी भूल जाते हैं।
अब मोदी-शाह क्या बोलेंगे? बिहार में चुनाव आयोग को नहीं मिले घुसपैठिए
मोदीजी और अमित शाह ने बिहार की चुनावी सभाओं में गला फाड़-फाड़ कर कहा कि महागठबंधन घुसपैठिओं के सहारे चुनाव जीतना चाहता है और चुनाव आयोग इन्हीं घुसपैठिओं को बाहर निकालने के लिए मतदाता शुद्धिकरण का काम कर रहा है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पूरी SIR की प्रक्रिया में महज 3 विदेशी नागरिक मिले हैं।
