पटना। बिहार की 1 करोड़ जीविका दीदियों को रोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार की रकम को लेकर बहुत कन्फ्यूजन है। पहला कन्फ्यूजन ये है कि ये रकम ऋण है या अनुदान है? क्योंकि अमित शाह जी ने साफ-साफ कहा है कि ये रकम रोजगार शुरू करने के लिए दिया गया है। तो फिर ये रकम सभी जीविका दीदियों को क्यों नहीं दिया गया है? आखिर जीविका दीदियों का चयन किस आधार पर किया गया है? क्या ये रकम राज्य सरकार के खाते से दिया गया है या फिर इसे सीधे केंद्र सरकार ने दिया है? आने वाले दिनों में जीविका दीदियों को 2 लाख रुपए और दिए जाने के भरोसे को लेकर लोग पूछ रहे हैं कि इसका चयन आखिर किस आधार पर किया जाएगा? याद रहे कि बिहार में 11 लाख स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब डेढ़ करोड़ महिलाओं ने ऊंची ब्याज दरों पर लोन ले रखा है। जिसे वो अदा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में जो 10 हजार की रकम उनके खाते में आई है वो अबतक लिए गए ऋण का ब्याज चुकाने में ही चला जाएगा। रोजगार क्या वो ख़ाक शुरू करेंगी।
क्या एनडीए ने 10 हजार देकर जीविका दीदियों को ठगने का काम किया है?
बिहार की महिलाओं को 2500 रुपए महीना देने के महागठबंधन के के चुनावी वादों की काट के लिए मोदीजी और नीतीश कुमार ने 1 करोड़ जीविका दीदियों के खाते में 10 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए हैं। हालांकि ये रकम ऋण है या अनुदान, इसे लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। इधर अमित शाह ने साफ किया है कि महिलाओं के स्वरोजगार शुरू करने के लिए ये रकम बतौर ऋण ही दी गई है।
