पटना। बिहार का चुनाव बहुत रोचक हो गया है। दोनों गठबंधन में भारी दरार है। पीके चुनाव से बाहर हो चुके हैं। महागठबंधन के सहयोगी आपस में ही जोर आजमाइश करते दिखाई दे रहे हैं। एनडीए कुनबे में भी बिखराव है। लिहाजा एक दल दूसरे के दल के प्रत्याशियों के लिए शायद ही काम करेंगे। हां, चिराग पासवान और बीजेपी मजबूती के साथ इक्ट्ठा लडेंगे। वैसे ही जैसे महागठबंधन में आरजेडी और वामपंथी दल चट्टानी एकता के साथ लडेंगे। वीआईपी बिना पेंदी का लोटा है। उसे 2-3 सीट भी आ जाए तो गनीमत मानिए। दरअसल महागठबंधन की लय और ताल कांग्रेस ने तोड़ दी है। ऐसे में जीती हुई बाजी हाथ से निकल भी सकती है। हमें याद रखना चाहिए कि एनडीए के साथ छठा दल चुनाव आयोग भी है। जिसपर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। वैसे बिहार चुनाव में इन तमाम पेंचीदगियों के बाद भी तेजस्वी यादव की हवा बहती दिखाई दे रही है। देखते ही बीजेपी इसका मुकाबला कैसे करती है?
बिहार में एक-दूसरे के खिलाफ ही ताल ठोंके रहे हैं दोनों गठबंधन के सहयोगी
चुनाव के नजदीक आते ही महागठबंध और एनडीए में दरार दिखाई देने लगी है। दोनों गठबंधन के लोग आपस में ही ताल ठोंक रहे हैं।
