पटना। पप्पू यादव अब खुलकर अपने एजेंडे पर आ गए हैं। उनका पहला एजेंडा था महागठबंधन को तोड़ना। जिसमें वो मोटे तौर पर कामयाब नजर आते हैं। अब उनका दूसरा एजेंडा है, तेजस्वी यादव को किसी तरह मुख्यमंत्री बनने से रोकना। तभी वो अब खुलेआम कह रहे हैं कि तेजस्वी कांग्रेस के बगैर मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे। वहीं कांग्रेस के कई नेता अब पप्पू यादव पर कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओ के साथ सांठगांठ कर टिकट बेचने के आरोप भी लगा रहे हैं। कुल मिलाकर यही लगता है कि महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका बेहद संदेहास्पद नजर आ रही है। मगर हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस आलाकमान ये सब मूकदर्शक बना देख रहा है। जैसे घर में जब आग लगी हो तो वो हाथ पर हाथ धरे उसे जलते हुए देखने को अभिश्प्त हों। जीती बाजी कैसे हारते हैं ये आप कांग्रेस से सीख सकते हैं।
मुख्यमंत्री बनने को लेकर पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव को दे दी बड़ी चुनौती
राजनीति में एक पुरानी कहावत है कि कांग्रेस को हराने के लिए कांग्रेस ही काफी है। विपक्ष को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। आप मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के ताजा उदाहरण देख लीजिए। जहां अनिर्णय की शिकार रही कांग्रेस ने खुद ही अपना बेड़ा गर्क कर लिया। रही सही कसर चुनाव आयोग ने भारी पक्षपात कर पूरी कर दी।
