पटना। पप्पू यादव अब खुलकर अपने एजेंडे पर आ गए हैं। उनका पहला एजेंडा था महागठबंधन को तोड़ना। जिसमें वो मोटे तौर पर कामयाब नजर आते हैं। अब उनका दूसरा एजेंडा है, तेजस्वी यादव को किसी तरह मुख्यमंत्री बनने से रोकना। तभी वो अब खुलेआम कह रहे हैं कि तेजस्वी कांग्रेस के बगैर मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे। वहीं कांग्रेस के कई नेता अब पप्पू यादव पर कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओ के साथ सांठगांठ कर टिकट बेचने के आरोप भी लगा रहे हैं। कुल मिलाकर यही लगता है कि महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका बेहद संदेहास्पद नजर आ रही है। मगर हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस आलाकमान ये सब मूकदर्शक बना देख रहा है। जैसे घर में जब आग लगी हो तो वो हाथ पर हाथ धरे उसे जलते हुए देखने को अभिश्प्त हों। जीती बाजी कैसे हारते हैं ये आप कांग्रेस से सीख सकते हैं।
बिहार चुनाव में पप्पू यादव और कृष्णा अल्लावरु पर लगा टिकट बेचने का आरोप
बिहार चुनाव में शुरूआती बढ़त मिलने के बाद महागठबंधन में शामिल कांग्रेस अपना लोभ संवरण नहीं कर पाई। पहले उसने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा होने का एलान करने में आनाकानी की। फिर सीट बंटवारे को लेकर भी मामले को अंत तक लटका कर रखा। अब कांग्रेस के नेता इसके लिए ना केवल पप्पू यादव और कृष्णा अल्लावरु को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं बल्कि दोनों पर कांग्रेस का टिकट बेचने के आरोप भी लगा रहे हैं। इस मामले में सामने आए एक ऑडियो में राजेश राम को ये कहते पाए गए हैं कि टिकट बंटवारे में उनकी बात नहीं सुनी गई।
