पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के घटक दलों के बीच भारी विवाद के बाद आखिरकार राहुल गांधी ने रिसेट बटन दबा ही दिया। राहुल गांधी ने ये कदम लालू यादव और दीपांकर भट्टाचार्य के साथ बातचीत के बाद उठाया है। अब बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर 23 अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की साझा प्रेस कांफ्रेंस होगी। इस प्रेस कांफ्रेंस में टिकट बंटवारे में मचे घमासान के बाद चट्टानी एकजुटता का परिचय दिया जाएगा। इसका मतलब ये है कि 23 अक्तूबर यानी नाम वापस लेने के आखिरी दिन आपस में 13 सीटों पर लड़ रहे महागठबंधन के सहयोगी दोस्ताना संघर्ष को कम से कम करने की कोशिश करेंगे। प्रेस कांफ्रेंस में तेजस्वी यादव, राजेश राम, कृष्णा अल्लावरू, मुकेश साहनी, दीपांकर भट्टाचार्य के साथ गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। बहुत मुमकिन है कि इसी प्रेस कांफ्रेंस में देर से ही सही तेजस्वी के चेहरे का एलान कर दिया जाए। दरअसल राहुल गांधी को इस बात का अहसास हो चला है कि अगर महागठबंधन के घटका दलों के बीच आपसी या दोस्ताना लड़ाई होगी तो इससे एनडीए को बैठे-बिठाए बढ़त मिल जाएगी। जिसका दोष कांग्रेस के मत्थे ही मढ़ा जाएगा। क्योंकि कांग्रेस ने शुरू से ही तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा मानने में आनाकानी की है। जिसका भारी नुकसान महागठबंधन को उठाना पड़ रहा है।
23 अक्तूबर को महागठबंधन की साझा प्रेस कांफ्रेंस, तेजस्वी के नाम का होगा एलान!
बिहार विधानसभा चुनाव में आपसी झगड़े के बाद पिछड़ते महागठबंधन के कील-कींटे को दुरुस्त करने के लिए राहुल गांधी ने रिसेट बटन दबा दिया है। जिसके तहत कांग्रेस के नेताओं को ना केवल बयानबाजी से दूर रहने की हिदायत दी गई है बल्कि महागठबंधन में दरार डालने वाले नेताओं की पहचान भी कर ली गई है। इन तमाम कवायदों के बाद अब 23 अक्तूबर को महागठबंधन की साझा प्रेस कांफ्रेंस होने जा रही है।
