– DelhiNews 24×7 ब्यूरो
चुनाव के ऐन पहले बीजेपी में मची भगमभाग के बीच टिकटों के बांटवारे को लेकर मंथन जारी है। बीते दो दिनों से इसपर हो रही माथापच्ची के बवाजूद पार्टी अबतक अपने सहयोगी दलों के लिए सीटों का फ़र्मूला तय नहीं कर पाई है। बीजेपी को डर सता रहा है कि अब अगर उन्होंने सहयोगी दलों की बांह मड़ोरने की कोशिश की तो वो भी उछलकर समाजवादी खेमे में शामिल हो सकते हैं। क्योंकि पिछले दो-तीन दिनों में योगी सरकार के 3 मंत्री और 14 विधायक पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार होने का एलान कर चुके हैं। ऐसे में पिछड़ी जाति के वोटों पर प्रभाव रखने वाले अपना दल और निषाद पार्टी की हैसियत बीजेपी में बढ़ गई है।
बीजेपी के घटक अपना दल (अनुप्रिया पटेल) की नेता पहले 25 सीट की मांग कर रहीं थीं। वहीं निषाद पार्टी भी 30 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं थी। जबकि बीजेपी इन्हें 10-12 सीटों में ही निपटाना चाह रही थी। लेकिन नई परिस्थियों में अब बीजेपी इन दलों को नाराज करने का दुस्साहस नहीं कर सकती। लिहाजा ऐसा समझा जा रहा है कि अपना दल को अब 14 सीट और निषाद पार्टी को 18 सीट देने पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है। हालांकि सीटों की अंतिम संख्या क्या होगी, इसका एलान होना अभी बाकी है।
योगी सरकार से रोज हो रहे इस्तीफे का सबसे बड़ा नुकसान बीजेपी को ये हो रहा है कि अब वो नेता भी शीर्ष नेतृत्व से आंख मिला कर बात कर रहे हैं जो पहले भीगी बिल्ली बने रहते थे। लेकिन अब उनके भी मुखर होकर अपनी बात कहने की खबरें छन-छन कर आ रहीं हैं। ऐसे में ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपने कुनबे को संभालने में अब कौन सी चाणक्य नीति अख्तियार करती है।