INDIA गठबंधन की बैठक से पहले बहुत से कयास लगाए जा रहे थे। क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस की लड़ाई और सीटों पर साझा सहमति नहीं बन पाने का बात भी कही जा रही थी। लेकिन 28 दलों वाली INDIA गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने पीएम पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम का प्रस्ताव कर बीजेपी के तोते उड़ा दिए हैं। इतना ही नहीं बीते दो साल से PM पद का उम्मीदवार बनने का सपना देख रहे नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल को भी एक झटके में ठिकाने लगा दिया। और तो और दुल्हा बनने को लालायित अरविंद केजरीवाल को सहबाला बना दिया और उनसे ही खड़गे के नाम के प्रस्ताव का समर्थन करा लिया।
लिहाजा आज देश की राजनीतिक गलियारे में एक ही चर्चा हो रही है कि मल्लिकार्जुन खड़गे INDIA गठबंधन के साझा उम्मीदवार हो सकते हैं। दलित समुदाय के खड़गे का नाम सामने आने के बाद से बीजेपी की पूरी रणनीति गड़बड़ा गई है। लिहाजा वो आज भी राहुल गांधी पर ही निशाना साधते नजर आ रहे हैं। क्योंकि बीजेपी को मालूम है कि अगर खड़गे पर निशाना साधा तो दलित वोटबैंक मायावती के सहयोग के बावजूद छिटक सकता है। और बीजेपी ऐसा कभी नहीं चाहेगी। लिहाजा जबतक बीजेपी बदले हुए गोलपोस्ट पर गोल दागने की प्रैक्टिस पक्का ना कर ले तबतक पुराने गोलपोस्ट पर ही दनादन गोल पर गोल दागती जा रही है।

मजेदार ये है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जब पत्रकारों ने इस बाबत सवाल पूछा तो उन्होंने इससे इंकार नहीं किया। उन्होंने ये कहकर अपना पाल्ला झाड़ लिया कि अभी मसला पीएम का नहीं है। नंबर लेकर दिल्ली आने का है। जब हमारे पास नंबर आ जाएंगे तो हम प्रधानमंत्री भी चुन लेंगे। बीजेपी की मुश्किल ये है कि अब उन्हें सही गोलपोस्ट नजर नहीं आ रहा है। एक तो वो मल्लिकार्जुन खड़गे पर सीधा हमला नहीं बोल पाएंगे दूसरे राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार के लिए तैयार रणनीति अब किसी काम की नहीं रह गई है।
वैसे लोकसभा और राज्यसभा से सांसदों के निलंबन की छाया में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक को काफी सफल माना जा रहा है। जिसमें देश के पैमाने पर कई साझा जनसभाओं का फैसला लिया गया है। जिसका सकारात्मक असर देखने में आएगा। क्योंकि आज मोदी सरकार लोकसभा से सांसदों को निलंबित करवाने की सेंचुरी लगा चुके हैं। राज्यसभा में भी हाफ सेंचुरी पूरी हो जाती अगर संसद का सत्र खत्म नही हो जाता।
इंडिया गठबंधन की खबर में ये बात भी सामने आई है कि ममता बनर्जी ने प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का सुझाव दे डाला है। हालांकि ये मांग कोई नई नहीं है। और अगर वाराणसी सीट में वोटों के बंटवारे पर नजर डालें तो करीब 4 लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। जिनकी बदौलत प्रियंका गांधी अपनी किस्मत आजमा सकती है। और अगर खुदा ना खास्ता जीत गईं तो भारतीय राजनीति में एक चमकता हुआ सितारा बनने में उन्हें देर नहीं लगेगी। लेकिन सवाल हिम्मत और हौसले का है। जो शायद इस वक्त तो कांग्रेस में नहीं दिखाई दे रहा है। कल क्या होगा कौन जानता है?