अरविंद केजरीवाल सच्चाई, ईमानदारी और भ्रष्टाचार से लड़ाई की कसमें खाकर 2014 में दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे। वो देश की हर समस्या के लिए राजनीतिज्ञों को कठघरे में खड़ा करने में कोई देरी नहीं करते थे। केजरीवाल तो यहां तक कहते थे कि अगर किसी राजनेता पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग जाएं तो उसे अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन समय का चक्र देखिए। जब दिल्ली के करीब 2000 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में केजरीवाल जेल गए तो इस्तीफा देने की बात तो छोड़ दीजिए, उन्होंने जेल से ही दिल्ली की सरकार चलाने का उद्घोष करने में जरा भी देर नहीं लगाई।

याद कीजिए निर्भया कांड। जब केजरीवाल ने इसके लिए दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को कठघरे में खड़ा करने में जरा भी देर नहीं लगाई। जबकि पुलिस उस वक्त भी केंद्र सरकार के पास ही थी। ये बात अलग है कि तब केंद्र में भी कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन आज जब दिल्ली में कोई आपराधिक घटना होती है तो केजरीवाल उससे अपनी सरकार का हाथ झाड़कर खड़े हो जाते हैं। अपराध का सारा दोष केंद्र सरकार के मत्थे मढ़ देते हैं।
दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां के मुख्यमंत्री के पास मोटे तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सफाई, परिवहन, पानी, बिजली, रोजगार आदि मुहैया कराने के काम हैं। जिसमें दिल्ली के आधुनिकीकरण का काम भी शामिल है। दिल्ली सरकार के पास पहले की तरह पुलिस और जमीन नहीं है। लिहाजा केजरीवाल इसे अपनी नाकामियों को छिपाने का एक अवसर के रुप में देखते हैं। पहले जहां एमसीडी में बीजेपी काबिज थी तो केजरीवाल के लिए स्थिति और भी मुफीद थी, क्योंकि तब वो सफाई, शिक्षा जैसे कई मसलों का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ देते थे। लेकिन एमसीडी में आम आदमी पार्टी के बहुमत के बाद उनके हाथ से ये अवसर जाता रहा है। लिहाजा 2025 के चुनाव में उनके सामने चुनौती बड़ी हो गई है।
ताजा मामला पेयजल का है। जो देश के हर नागरिक की बुनियादी जरूरत है। हर घर तक पीने योग्य साफ पानी पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि 11 साल तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहने के बाद भी केजरीवाल साहब बड़ी बेशर्मी के साथ ये कहते हैं कि मैं दिल्ली के लोगों को साफ पानी मुहैया नहीं करा पाया। दरअसल हकीकत ये है कि केजरीवाल साहब दिल्ली के हर गली-मुहल्लों तक पानी ही नहीं पहुंचा पाए हैं। दिल्ली में टैंकर माफिया का साम्राज्य चलता है। जो लोगों से पानी के लिए मोटी रकम वसूल करते हैं। मुफ्त पानी की योजना का उनके लिए कोई मायने ही नहीं है। लेकिन आज केजरीवाल पानी की किल्लत का ठीकरा चुनाव से पहले हरियाणा पर फोड़ते नजर आ रहे हैं।
यही हाल सड़क और सफाई का है। दिल्ली के एनडीएमसी के इलाके को छोड़ दें तो गली-मुल्लों में सड़कों की हालत बेहद खराब है। सड़क टूटी हैं और कूड़ा-कचरा उठाने के इंतजाम सही नहीं हैं। सीवर लाइन का घोर आभाव है। लिहाजा गली-मुहल्लों की सड़कों पर नालों का गंदा पानी बहता रहता है। दिल्ली की हवा में जाड़े के वक्त सांस लेने लायक नहीं रह जाती। पहले केजरीवाल इसका ठीकरा पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने पर फोड़ते थे। लेकिन पंजाब में आप की सरकार आने के बाद अब वो इसे उत्तर भारत की समस्या बता रहे हैं और इसका भी दोष केंद्र सरकार पर ही मढ़ते नजर आते हैं। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि केजरीवाल बीते 11 साल में राजनीति के चतुर खिलाड़ी बन गए हैं।