-विमल कुमार
राम- हनुमान! तुम सुबह-सुबह कहां जा रहे हो, हाथों में बैनर और तख्तियां लिए हुए।
हनुमान- प्रभु! मैँ धरना प्रदर्शन करने जा रहा हूँ।
राम- क्या महंगाई के खिलाफ, बेरोजगारी के खिलाफ या किसानों के मुद्दे पर सुबह-सुबह धरना दोगे इस ठंड में।
हनुमान- नहीं प्रभु! आपके साथ जो अन्याय हुआ है उसके लिए मैं लड़ने जा रहा हूं, धरना देना जा रहा हूं।
राम- अरे भाई बताओ तो सही। मेरे साथ क्या अन्याय हुआ?
हनुमान- प्रभु! पांच-पांच लोगों को भारत रत्न मिल गया और आपको भारत रत्न आज तक नहीं मिला जबकि आप तीनों लोगों के स्वामी हैं। हमारे करुणा निधान हैं। पालनहार है। सत्य के लिए लड़े। 14 साल बनवास रहे।
राम- लेकिन हनुमान, मुझे भारत रत्न क्यों मिलेगा? मैं तो किसी काम का रहा नहीं? अब तो मंदिर भी बन गया। मैं तो वोट भी नहीं दिलवा सकता।

हनुमान- प्रभु! लेकिन आपके नाम पर तो अभी भी वोट मिल सकता है। लोग आपके लिए पागल हुए जा रहे हैं और इस चुनाव में आप उनका बेड़ा पार बड़ी आसानी से कर सकते हैं। प्रभु! जब चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दे दिया। नरसिम्हा राव को दे दिया। कर्पूरी ठाकुर को दे दिया। लाल कृष्ण आडवाणी को दे दिया। स्वामीनाथन को दे दिया। तो क्या आपका योगदान इन लोगों से भी कम है? क्या आपने इस देश और समाज के लिए इन लोगों से कम काम किया है? आपने तो रावण का वध किया है लेकिन आज तो हमारे नेताओं का रावण से गठबंधन है।
महाराज आपके साथ बहुत अन्याय हुआ है। मैं इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं। मैं आमरण अनशन करूंगा कि आपको भारत रत्न मिलकर रहे।
राम- हनुमान! गली में कोई राजू निगम भारत रत्न ले लो, भारत रत्न ले लो, चिल्ला रहे हैं ।
हनुमान- हां प्रभु! मैं ने भी सुना है। वह कह रहे हैं, भारत रत्न ले लो, भारत रत्न ले लो। वह भारत रत्न बेच रहे हैं। अगर सरकार ने आपको भारत रत्न नहीं दिया तो मैं राजीव निगम से ही एक भारत रत्न खरीद कर आपको जरूर दूंगा।
राम- हनुमान! मेरी नाक मत कटवायो। मुझे किसी भारत रत्न की जरूरत नहीं है।
हनुमान- तो कहिए मैं आपको मोदी रत्न दिलवा दूं।
राम- नहीं पवनसुत! मुझे किसी रत्न की जरूरत नहीं है। मैं तो यही चाहता हूं कि इस देश की गरीब जनता खुशहाल रहे। लोगों को नौकरियां मिले। लोगों को घर और छत मिले। मेरे लिए वही सबसे बड़ा भारत रत्न है।
(Disclaimer: प्रभु श्रीराम और हनुमानजी के बीच ये काल्पनिक संवाद है)