-विमल कुमार
हनुमान- प्रभु! क्या इस विश्व पुस्तक मेले में आपकी कोई किताब आ रही है?
राम- नहीं मैं तो कोई लेखक हूं। मेरी कोई किताब कैसे आएगी? और अगर कोई किताब मैंने लिख भी दी तो कौन छापेगा उसे। आजकल किताबों के छापने का संकट भी तो है।
हनुमान- नहीं प्रभु! आपके लिए क्या संकट? आप अगर कुछ भी लिख दें तो प्रकाशक हाथों हाथ छाप देंगे। कौन नहीं चाहेगा प्रभु राम की किताब छापना। लेकिन यह तो बताइए अगर आप लिखेंगे तो क्या लिखेंगे? इसकी थीम क्या होगी?
राम- हनुमान! मैंने तो आज तक कुछ लिखा ही नहीं इसलिए लिखना मेरे बस का नहीं है।
हनुमान- तो क्या प्रभु! मैं आपके नाम से कुछ लिख दूं। इसमें मेरा भी भला हो जाएगा। आपके नाम की किताब की रॉयल्टी मुझे भी मिल जाएगी।
राम- हनुमान! सुना है कि हिंदी वाले रायल्टी नहीं देते। हिंदी के बड़े-बड़े प्रकाशक भी रॉयल्टी मार जाते हैं।

हनुमान- लेकिन प्रभु! आपकी कौन रॉयल्टी मार सकता है? आप तो तीनों लोगों के स्वामी हैं। आपके लिए किताब छाप कर प्रकाशक भी गौरवान्वित होगा। वह जल्दी ही करोड़पति हो जाएगा। देखा नहीं आप पर लिखी गई कई किताबों की आजकल सोशल मीडिया पर विज्ञापन आ रहे हैं। कोंबो प्लान चल रहा है। जब से अयोध्या में मंदिर बना है तब से प्रकाशक भी धड़ाधड़ आपके बारे में किताबें छापने लगे हैं। ऐसे में अगर आप खुद कोई किताब लिख देंगे तो प्रकाशक तो धन्य हो जाएंगे और विश्व पुस्तक मेले में इसका लोकार्पण तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर सकते हैं ।अगर मोदी जी नहीं आते हैं तो आप भारत रत्न आडवाणी जी से ही लोकार्पण करवा सकते हैं।
राम- लेकिन हनुमान! मुझे समझ नही आ रहा, आडवाणी को इस उम्र में भारत रत्न देकर मोदी जी ने क्या संदेश दिया है? क्या आडवाणी जी अपना अपमान भूल जाएंगे? पिछले दिनों राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में आडवाणी जी को बुलाया तक नहीं। क्या भारत रत्न देकर आडवाणी जी के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश हो रही है?
हनुमान- प्रभु! यह तो मैं नहीं कर सकता हूं लेकिन अगर आप आडवाणी पुराण लिख दें तो किताब जरूर हिट हो जाएगी और आप एक लेखक के रूप में भी अमर हो जाएंगे। हो सकता है आपको कूकर अवार्ड या ज्ञान हीट अवार्ड या फिर वाहित्य अकड़मी पुरस्कार मिल जाये। उस किताब का लोकार्पण आडवाणी जी कर दें तो सोने पर सुहागा।
राम- हनुमान तुमने बहुत अच्छा आईडिया दिया है लेकिन अब तो एक सप्ताह बाद ही पुस्तक मेला शुरू होगा। इतनी जल्दी मै कैसे किताब लिख सकता हूं।
हनुमान- प्रभु! आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लीजिए। चैट जीपीटी से किताब लिख सकते हैं।
राम- हनुमान! सोचता हूं अब नई तकनीक से कोई किताब मैं भी लिख डालूं। रज़ा फाउंडेशन वाले भी मदद कर देंगे।
हनुमान- प्रभु! जब एक कवयित्री को महान बनाने में वे मदद कर सकते हैं तो आपके लिए क्यों नहीं।
राम- जरा ‘अवा’ से बात कर लो हनुमान!
(Disclaimer: प्रभु श्रीराम और हनुमानजी के बीच ये काल्पनिक संवाद है)