पटना। राहुल गांधी ने खास मिशन के तहत अशोक गहलोत को पटना भेजा है। राहुल गांधी का वो मिशन है किसी तरह लालू यादव और तेजस्वी यादव को गुडबुक में रखना। इसके लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं को डांटना-डपटना भी पड़े, तो चलेगा। इस मिशन के तहत कांग्रेस कई सीटों पर पीछे हटने वाली है। मुमकिन है कि आरजोडी भी दिखावे के लिए एक-दो सीटों पर पीछे हट जाए। ताकि कल की प्रस्तावित साझा प्रेस कांफ्रेंस में किसी तरह का आपसी विवाद दिखाई ना दे।

इसी रणनीति के तहत आज अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव और लालू यादव से मुलाकात की। लेकिन कई सीटों पर महागठबंधन में दोस्ताना संघर्ष को लेकर वो किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाए। इन मुलाकातों के बाद उन्होंने कहा कि बड़े गठबंधन में अगर कुछ सीटों पर दोस्ताना संघर्ष हो तो इसमें कोई नई बात नहीं है। यानी बात बनी नहीं है। मगर गहलोत के आने का कोई सकारात्मक संदेश तो जाना चाहिए। लिहाजा मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर तेजस्वी यादव के नाम के एलान पर सहमति बन गई है। जिससे महागठबंधन के लड़ाई-झगड़े के बीच एक सकारात्मक संदेश जा सकता है। वैसे कृष्णा अल्लावरू, शकील खान, राजेश राम और पप्पू यादव के बारे में खबर है कि ये लोग अब भी इस बात के लिए तैयार नहीं हैं कि कांग्रेस दो कदम पीछे हटे। भले ही कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़े। इन्हीं लोगों पर बिहार में पार्टी का टिकट बेचने के गंभीर आरोप लगे हैं।
दरअसल बिहार चुनाव में राहुल गांधी का भविष्य भी दांव पर लगा है। और वो एक-दो नेताओं या सीट के लिए अपने भविष्य को दांव पर लगाने का खतरा मोल नहीं ले सकते। उधर तेजस्वी यादव ने आज अशोक गहलोत से मुलाकात से पहले जीविका दीदियों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर कांग्रेस को पहले ही घुटनों पर ला दिया है। कांग्रेस के सामने लालू यादव के सामने झुकने और उनकी बातों को मानने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। क्योंकि आप युद्ध के मैदान के बीच अपना घोड़ा नहीं बदल सकते और ना ही घोड़े से नीचे उतर सकते हैं।