दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग (Transport Departmnet) पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में भेजने को लेकर NGT के आदेश को लागू करने में घोर मनमानी कर रहा है। परिवहन विभाग इस मामले में अपने निजी स्वार्थ को साधते हुए एक तो पुरानी गाड़ियों को मालिक को किसी किस्म की राहत नहीं दे रहा है, वहीं कबाड़ के कारोबारियों (Scrap Dealers) को भी घोर मनमानियों का शिकार होना पड़ रहा है। दरअसल कबाड़ कारोबारियों को लेकर NGT के निर्देश पर दिल्ली सरकार ने 2018 में आनन-फानन में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को स्क्रैप करने की नीति बनाई। जिसके तहत दिल्ली के 8 वाहन स्क्रैपर्स को इसका लाइसेंस जारी किया गया। लेकिन स्क्रैपिंग के धंधे में मुनाफे को देखते हुए व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी यूनिट (Vehicle Scraping Facility Unit) लगाने वाले कारोबारियों को क्या पता था कि उनके बुरे दिन जल्दी ही शुरू होने वाले हैं।
दरअसल वाहन स्क्रैपिंग को लेकर भारत सरकार के परिवहन विभाग की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद दि्ल्ली सरकार ने एक ही झटके में बीते 19 जनवरी 2023 को दिल्ली के सभी 8 स्क्रैप डीलरों के लाइसेंस रद्द कर दिए। परिवहन विभाग के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ दिल्ली के कई स्क्रैप डीलरों ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने उनकी सुनवाई करते हुए तय समयसीमा के भीतर स्क्रैप डीलरों को नई गाइडलाइंस के मुताबिक नया लाइसेंस जारी करने का आदेश दिया। लेकिन दिल्ली परिवहन विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए दिल्ली से बाहर दूसरे राज्यों के 4 स्क्रैप डीलरों को स्क्रैपिंग का लाइसेंस जारी कर दिया। इतना ही नहीं उन्हें दिल्ली के अलग-अलग MCD क्षेत्रों से गाड़ी उठाने के लिए उनके लिए MCD के इलाकों का बंटवारा भी कर दिया।



जब दिल्ली के स्क्रैप डीलरों ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना बताते हुए इसकी शिकायत की तो हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग को जमकर फटकार लगाई। मगर ट्रांसपोर्ट विभाग कहां मानने वाला था! उसने फिर एक नया आदेश जारी किया जिसमें 4 की जगह 8 कबाड़ कारोबारियों को लाइसेंस जारी कर दिया। मजे की बात ये है उस सूची में दिल्ली में पहले से करोड़ों की लागत से स्क्रैपिंग सेंटर लगाने वाले एक भी कबाड़ कारोबारी का नाम शामिल नहीं है। कबाड़ कारोबारियों का कहना है कि परिवहन विभाग का फैसला पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) पॉलिसी के खिलाफ है। इससे करोड़ों की लागत से निर्मित उनकी स्क्रैपिंग इकाई खुद कूड़ा हो गईं हैं।
स्क्रैप कारोबारियों का आरोप है कि परिवहन विभाग के अधिकारी RVSF पॉलिसी के विरुद्ध जाकर अपने निजी स्वार्थ की वजह से दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड वाहन स्क्रैपर्स को दिल्ली नगर निगम के क्षेत्रों में खड़े वाहनों को उठाने का आदेश दे दिया है। इतना ही नहीं इस काम में उन्होंने अपनी इंफोर्समेंट टीम को भी झोंक रखा है ताकि MCD क्षेत्रों से जबरदस्ती गाड़ियों को उठवाने में दूसरे राज्यों के वाहन स्क्रैपर्स की मदद की जा सके।
वहीं जिन लोगों की गाड़ियां उठाई गईं हैं उनका कहना है कि दूसरे राज्यों के स्क्रैपर्स घोर मनमानी कर रहे हैं। नियम-कानूनों की अनदेखी की जा रही है। और वाहनों मालिकों को पुरानी गाड़ियों के महज 15 से 25 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जो बाजार में लोहे के कबाड़ भाव के मुकाबले आधे से भी कम हैं। लेकिन दिल्ली के कबाड़ कारोबारियों की तरह ही दिल्ली के पुराने वाहनों के मालिकों की भी कहीं कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है।
परिवहन विभाग के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ कुछ स्क्रैपर्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को दिल्ली के स्क्रैपर को फौरी राहत देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आप इस तरह किसी कारोबारी का काम बंद नहीं कर सकते। मगर परिवहन विभाग ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए स्क्रैपर्स को कोई भी रिलीफ देने से मना कर दिया है। जिसके चलते इनके पास पहले से खड़े वाहनों को स्क्रैप करने का अधिकार भी नहीं रहा है। साथ ही स्क्रैपिंग सेंटर को बनाने का पैसा एक झटके में बेकार हो गया है। लिहाजा दिल्ली के कई स्क्रैप कारोबारी कर्ज के बोझ में दब गए हैं।

दिल्ली के वाहन स्क्रैपर्स अब दिल्ली में ही फिर से पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के लाइसेंस के लिए आवेदन करना चाहते हैं लेकिन दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (DPCC) के पोर्टल पर व्हीकल स्क्रैप डिस्मेंटलिंग कैटेगरी ही मौजूद नहीं है। जिसकी वजह से पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के लिए वो आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। जबकि दिल्ली में इकाई स्थापित करने के लिए सबसे जरूरी कागजात वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र ही है।
अब अगर परिवहन विभाग की वेबसाइट ही नहीं खुल रही है। प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए आवेदन ही नहीं किया जा सकता तो फिर कोई कबाड़ कारोबारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग से आनापत्ति प्रमाण पत्र यानी (NOC) कहां से ला सकता है? मगर दिल्ली सरकार के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और परिवहन विभाग ने कभी इस पर गौर नहीं फरमाया है। जिसका हर्जाना दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहन स्क्रैपर्स को उठाना पड़ रहा है। उपर से दिल्ली सरकार माननीय उच्चतम न्यायालय में झूठे हलफनामे देती है कि हमने दिल्ली के 3 तीन व्हीकल स्क्रैपर को लाइसेंस दिया है।
दरअसल 2018 के NGT गाइडलाइन की आड़ में दिल्ली के वाहन स्क्रैपर्स के साथ भयंकर अन्याय और षड्यंत्र परिवहन विभाग कर रहा है। जिसके चलते दिल्ली के सभी वाहन स्क्रैपर्स को अपनी आजीविका चलाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मगर इनकी कोई सुनवाई परिवहन विभाग द्वारा नहीं की जा रही है और दूसरे राज्यों के वाहन स्क्रैपर्स को दिल्ली में जबरन गाड़ी उठाने का ठेका बांटा जा रहा है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के बाद कबाड़ का कारोबार परिवहन विभाग के लिए कामधेनु साबित हो रहा है वहीं दिल्ली के कबाड़ कारोबारी दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हो गए हैं।