कांग्रेस के बागी नेताओं यानी जी-23 नेताओं के तेवर को देखते हुए लग रहा था कि इस बार कांग्रेस कार्यसमिति में सोनिया गांधी पर किसी दूसरे नेता को पार्टी की बागड़ोर सौंपने का दबाव बनाया जा सकेगा। लेकिन हुआ वही जिसकी उम्मीद थी। कांग्रेस कार्यसमिति की चली लंबी बैठक के बाद जहां पार्टी ने अगले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहने का संकल्प दोहराया, वहीं सोनिया गांधी के नेतृत्व में आस्था और विश्वास जताते हुए उनकी ही अगुवाई में आगे बढ़ने का ऐलान किया।
कांग्रेस कार्यसमिति के बाद पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए गंभीर चिंतन का विषय हैं। पार्टी का यह मानना है कि अपनी रणनीति में खामियों के चलते हम जहां चार राज्यों में बीजेपी सरकारों के कुशासन को प्रभावी ढंग से उजागर नहीं कर पाए, वहीं पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मिले सीमित समय में सत्ता विरोधी लहर पर काबू नहीं पाया जा सका।

कांग्रेस पार्टी ने संकल्प दोहराया कि वो देश में व्याप्त राजनीतिक निरंकुशता के खिलाफ करोड़ों भारतीयों की आशाओं का प्रतिनिधित्व करती है और अपनी इस जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह से सजग और जागरूक है। कार्यसमिति ने कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं और नेताओं के प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया जिन्होंने विषम परिस्थितियों में पांच राज्यों के इन चुनावों में पार्टी और उसके उम्मीदवारों के लिए अथक परिश्रम किया।
कांग्रेस कार्यसमिति ने सर्वसम्मति से श्रीमती सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में अपने विश्वास की पुनः पुष्टि की और कांग्रेस अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वे आगे बढ़ पार्टी का नेतृत्व और मजबूती से करें एवं आवश्यक तथा व्यापक संगठनात्मक बदलाव करें तथा राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए संगठन की सभी कमजोरियों को दूर करें।
कार्यसमिति में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ये भी कहा किfसंसद के बजट सत्र के बाद कांग्रेस एक व्यापक चिंतन शिविर बुलाएगी जिसमें भविष्य की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श होगा और पार्टी के आगे का रोड मैप निर्धारित किया जाएगा। चिंतन शिविर के आयोजन के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की एक और बैठक भी जल्दी ही बुलाई जाएगी।