पटना। तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने के एलान मात्र से ही महागठबंधन में फिर से जान आ गई है। महागठबंधन के घटक दलों के कार्यकर्ताओं में जोश भर गया है। उनके बीच फिर से दुआ-सलाम शुरू हो गई है। सब एक-दूसरे को कह रहे हैं- चलो जो होना था सो हुआ, अब आगे लड़ाई मिलकर जीतनी है। जमीनी कार्यकर्ताओं का ये जोश जहां एनडीए के लिए मुसीबत का सबब बनने जा रहा है, वहीं महागठबंधन में करीब एक दर्जन सीटों पर दोस्ताना संघर्ष को निपटाने के किसी फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन पाई है।
इस प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी के दूत अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री के चेहरा के तौर पर तेजस्वी यादव के नाम का एलान किया। गहलोत के इस एलान के बाद महागठबंधन के दूसरे सहयोगियों ने राहत की सांस ली है, जो पहले ही तेजस्वी को अपना नेता मान चुके थे। लेकिन अब कांग्रेस का ये कांटा महागठबंधन के गले से निकल गया है। दरअसल महागठबंधन को बार-बार मुख्यमंत्री के चेहरे के सवालों से जूझना पड़ रहा था।

उधर बीजेपी ने तेजस्वी यादव के नाम के एलान से परेशान नजर आई। बीजेपी ने सामने आकर ये सवाल खड़ा किया कि आज के प्रेस कांफ्रेंस में पोस्टर पर सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर क्यों थी? इस बैनर में राहुल गांधी, लालू यादव और महागठबंधन के दूसरे नेताओं की तस्वीर क्यों नहीं थी? जबकि इस बैनर पर गठबंधन के सभी दलों के चुनाव चिन्ह लगाए गए थे। इस बारे में आरजेडी का कहना है कि आज चूंकि तेजस्वी के नाम का एलान होना था इसीलिए बैनर को इस तरह से डिजाइन किया गया था। तेजस्वी के नाम के एलान के बाद अब बिहार चुनाव प्रचार में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ उनकी साझा सभाओं का रास्ता भी साफ हो गया है।
आज की प्रेस कांफ्रेंस और तेजस्वी के नाम के एलान से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव सबसे ज्यादा आहत नजर आए। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में साफ तौर पर कहा कि बिहार की जनता केवल राहुल गांधी की तस्वीर और नाम पर ही वोट डालेगी। यानी साफ है कि पप्पू यादव, जिन्हें महागठबंधन को तोड़ने का सूत्रधार माना जा रहा था, वो अब दरकिनार कर दिए गए हैं। और वो अपनी भड़ास निकालते नजर आ रहे हैं।
आज दिनभर के घटनाक्रम के बाद ये सवाल अब एनडीए से पूछा जा रहा है कि उनके मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन है? ये सवाल बीजेपी और घटक दलों से पूछा जा रहा है। याद रहे कि अमित शाह ने बार बार कहा है कि हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रहे हैं। मगर अब इतने से काम चलने वाला नहीं है। एनडीए को सामने आकर सीधे तौर पर ये कहना होगा कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री बनेंगे।
