विधानसभा चुनाव के बाद पीएफ के दायरे में आने वाले देश के 6 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर में भारी कटौती का फैसला किया है। अब आपको अपने पीएफ अकाउंट में जमा राशि पर 8.5% की जगह 8.1% की दर से ब्याज मिलेगा। पीएफ पर ये ब्याज दर बीते 40 साल में सबसे कम है।
इससे पहले साल 1977-78 में ईपीएफओ ने ब्याज दर 8% किया था। उसके बाद से ये लगातार 8.25% या उससे ज्यादा रही है। बीते दो वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 में खराब अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी संकट के बावजूद ब्याज दर 8.50% रही थी। मोदी सरकार के इस फैसले का असर उन वेतनभोगी कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा होगा जो अपने भविष्य के लिए पीएफ से होनेवाली आय पर निर्भर हैं।
उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर आपके पीएफ अकाउंट में जमा राशि 10 लाख रुपए है तो पहले जहां आपको इस जमा रकम पर मोटे तौर पर 85000 रुपए ब्याज मिलता, वहीं अब ब्याज की रकम घटकर 81000 हो जाएगी। यानी आपको पीएफ ब्याज दर घटाने के फैसले से एकमुश्त 4 हजार रुपए का नुकसान होगा। कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों ने ईपीएफओ के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। और सरकार से इसे कम से कम बीते साल के स्तर पर बनाए रखने की मांग की है। ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रखा जा सके।