-अर्चना
दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर मुकाबला काफी हद तक द्विध्रुवीय माना जा रहा है, जिसमें आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक संयुक्त विपक्षी टीम के रूप में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मैदान में हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी अपनी किस्मत आजमाई है। बहुजन समाज पार्टी ने दिल्ली की सभी सात सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है।
अगर हम बीएसपी के लोकसभा चुनाव लड़ने के इतिहास की बात करें तो बसपा ने 1989 में 245 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर चुनावी शुरुआत की, जिनमें से चार पर जीत हासिल हुई। पार्टी ने तब दिल्ली में भी पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन मुश्किल से 3.7% वोट शेयर हासिल कर सकी। बसपा संस्थापक कांशीराम ने पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और उन्हें 11.2% वोट मिले थे।

हालांकि पार्टी राजधानी में लगातार चुनाव लड़ रही है, और इसका सबसे अच्छा प्रदर्शन 2008 के दिल्ली विधान सभा चुनावों में हुआ जब उसने 14% वोट हासिल किए। दो सीटें भी जीतीं और छह पर दूसरे स्थान पर रही। लेकिन उसके बाद से बीएसपी का प्रदर्शन लगातार गिर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को 1.2% वोट मिले थे, जो 2019 के चुनाव में घटकर 1% रह गए।
अगर हम एमसीडी चुनावों की बात करें तो पार्टी ने 2007 में दिल्ली में 17 पार्षद, 2012 में 15 और 2017 में तीन पार्षद भेजे। हालांकि 2022 में पार्टी खाता खोलने में विफल रही। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि जब भी कोई उम्मीदवार दिल्ली में कुछ क्षमता दिखाना शुरू करता है, तो अन्य पार्टियां उसे खरीद लेती हैं।
पूरी दिल्ली में करीब 20% SC वोटर्स हैं। साथ ही यहां पर उत्तर प्रदेश के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं और जो दिल्ली के ही वोटर बन चुके हैं। ऐसे में बसपा को इस बार के लोकसभा में खोई हुई साख वापस पाने का मौका है। इसी के मद्देनजर बसपा ने सभी सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है।
लेकिन देखा जाए तो बीएसपी अपने विकास के ढलान पर है, ऐसे में ये कयास लगाए जा सकते हैं कि बीएसपी, बीजेपी के लिए ही सब तंत्र जोड़ने की कोशिश में हो सकती है। हालांकि बसपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी का प्रदर्शन पिछले कुछ चुनावों की तुलना में कहीं बेहतर होगा और पार्टी भाजपा और आप-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है।
“हम एक राष्ट्रीय पार्टी हैं और दिल्ली में हमारा बहुत बड़ा कैडर आधारित जनाधार है। आप हमें हल्के में नहीं ले सकते। आप हमें सभी सातों सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ते हुए देखेंगे।”
दिल्ली में बीएसपी के चुनाव में उतरने से त्रिकोणीय समीकरण बन रहे हैं जिसका पूरा फायदा बीजेपी को होने वाला है। दिल्ली प्रदेश पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि ‘बसपा का वफादार वोट शेयर – दलित और कुछ स्थानों पर मुस्लिम भी – “आप” ने छीन लिया था, लेकिन अब उसका आप से मोहभंग हो गया है। हमारे मतदाता पार्टी में वापस आ रहे हैं। वे कांग्रेस और आप दोनों से नाराज हैं और इस बार उनके खिलाफ वोट करेंगे।’
इससे स्पष्ट हो जाता है कि दिल्ली के दलित वोट जो कि इंडिया गठबंधन को मिलने वाले थे वह कट जाएंगे जिसका पूरा फायदा बीजेपी को जाने वाला है। इसीलिए कुछ वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि दिल्ली में बीएसपी को मिलने वाला वोट अप्रत्यक्ष रुप से बीजेपी को ही जाएगा।
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