
– अर्चना
वाराणसी में मतदान सातवें फेज में आज होना है। खास बात ये है कि इस चुनावी लड़ाई में ना चेहरे बदले हैं ना हिम्मत टूटी हैं। जी हां, फिर मोदी को टक्कर देने के लिए मैदान में उतरे है अजय राय। अजय राय दो बार मोदी से हार चुके है और तीसरी बार फिर से लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री को टक्कर देंगे। एक ऐसे नेता को टक्कर देंगे जो एक भी चुनाव नही हारे हैं। क्योंकि मोदी राजनीति का हर एक पैंतरा जानते हैं। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि इनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय हैं कौन?
एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार से आने वाले अजय राय वाराणसी के ही मूल निवासी हैं। अजय राय उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं। इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बीजेपी के साथ शुरू की थी। वो बीजेपी में वर्ष 1996 से वर्ष 2009 तक रहे। इस बीच अजय राय ने कोलसला निर्वाचन क्षेत्र से 3 बार विधानसभा चुनाव जीता। 2009 में इन्होंने पार्टी से लोकसभा का टिकट मांगा। पार्टी द्वारा मना करने पर इन्होंने बीजेपी का साथ छोड़ दिया और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 2009 में ही अजय राय ने समाजवादी पार्टी की तरफ़ से लोकसभा का पहला चुनाव लड़ा। जिसमें राय असफल रहे। 2012 में इन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की और 2012 में ही पिंडरा निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। 2023 में पार्टी ने इनके मेहनत, योगदान और तजुर्बे को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष भी बना दिया। इनको स्थानीय बाहुबली भी माना जाता हैं और इनका अपराधिक इतिहास भी रहा है।

अजय राय को 2019 लोकसभा चुनाव में 14.38 प्रतिशत वोट मिले जबकि मोदी को 63.62 प्रतिशत वोट मिले थे वही अगर बात करे कि सबसे अधिक वोट पाने वालो कि श्रेणी कि तो अजय राय को सपा प्रत्याशी शालिनी यादव (18.40 प्रतिशत) से भी कम वोट मिले। 2019 मे सबसे अधिक वोट पाने वालों कि सूची में वो तीसरे नंबर पर रहे है। 2014 के चुनाव में अजय राय को 7.34 प्रतिशत वोट मिले जबकि सबसे अधिक नरेन्द्र मोदी 56.37 प्रतिशत और मोदी के बाद दूसरे नंबर पर रहे आप पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को 20.30 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार इंडिया गठबंधन साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है। इसकी वजह से आजय राय के वोट बैंक में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि 2014 के मुकाबले अजय राय को 2019 में ज्यादा वोट मिले थे यानी आजय राय चुनाव में बढ़त बनाने में कामयाब होते दिखे है। लेकिन ये बढ़त इतनी ज्यादा नहीं है कि वो प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती पेश कर सकें।

हालांकि लगातार दो बार हार का सामना करने के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने तीसरी बार फिर अजय राय पर भरोसा जताया है। मगर सोचने वाली बात हैं की पार्टी ने वाराणसी से कोई दूसरा उम्मीदवार क्यूं नहीं उतारा। क्या पार्टी में इनसे बेहतर कोई नेता नहीं हैं या फिर पार्टी को लगता है की इस बार अजय राय पूरी तैयारी के साथ आए हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार अजय राय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने में कामयाब होते हैं या नहीं? यहां कांग्रेस के लिए संतोष की बात बस इतनी सी है कि नरेंद्र मोदी को 2014 के मुकाबले 2019 में वाराणसी में कम वोट मिले हैं। 2024 में उनको मिलने वाले वोट के और नीचे जाने की संभावना है। लेकिन वो चुनाव हार भी सकते हैं ये कहना जल्दबाजी होगी।
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