दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के समन के बाद आम आदमी पार्टी में मंथन और कयासबाजी का दौर जारी है। पार्टी में इस बात को लेकर गंभीर चर्चा है कि अगर केजरीवाल को जेल जाना पड़ा तो दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या केजरीवाल साहब जेल से ही दिल्ली की सरकार चलाएंगे या फिर सत्ता की कमान अपने किसी सिपहसालार के हाथों में सौंप देंगे। उनके सिपहसालारों में जिन नामों पर चर्चा हो रही है उनमें आतिशी सिंह, राघव चड्ढा, सौरभ भारद्वाज प्रमुख हैं। राजनीति की पतंग उड़ाने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि हो सकता है केजरीवाल साहब सत्ता की कमान अपनी धर्मपत्नी सुनीता केजरीवाल को सौंप दें। इन नामों पर बीते दो दिनों से पार्टी में विचार-विमर्श का दौर जारी है। इस बाबत पार्टी के बचे हुए प्रमुख नेताओं के साथ मुख्यमंत्री की लगातार बैठकें हो रहीं हैं ताकि किसी स्वीकार्य नतीजे तक पहुंचा जा सके।

अबतक का अनुभव यही बताता है कि करोड़ों के शराब घोटाला मामले में ईडी और सीबीआई की पूछताछ के लिए बुलाए गए आम आदमी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। और उनकी कोर्ट से जमानत तक नहीं हो पा रही है। खासकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए शराब नीति घोटाला मामले में 338 करोड़ रुपए के मनी ट्रेल यानी पैसे के अवैध लेनदेन पर मुहर लगा दी है। आर्थिक घोटाले यानी शराब माफियाओं के साथ सांठगांठ और कमीशन का मामला साबित होने के बाद केजरीवाल को लगता है अब उनके जेल जाने का नंबर आ ही गया है। लिहाजा पार्टी की अहम बैठकों में उनकी गिरफ्तारी के बाद की रणनीति को अंजाम दिया जा रहा है।
केजरीवाल के सामने फिलहाल दो चुनौतियां हैं। इस घोटाले में शराब कारोबारियों का कमीशन 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किए जाने से उनकी कट्टर ईमानदार छवि को गहरा धक्का लगा है और खुद को ईमानदार और पूरी दुनिया को बेईमान कहने की उनकी ताकत कमजोर पड़ गई है। मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अरविंद केजरीवाल को ईडी के समन के बाद तो सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज भी राजस्व के नुकसान की बात दबे स्वर में स्वीकार करते हैं। सौरभ भारद्वाज का कहना है कि ‘जब किसी नीति में बदलाव होता है तो किसी को फायदा और किसी को नुकसान होता ही है। इसमें नई बात क्या है। दरअसल मोदीजी राजनीतिक तौर पर केजरीवाल को नहीं हरा पा रहे हैं। लिहाजा अब वो पार्टी को ही नेस्तनाबूद करना चाहते हैं। इसकी पूरी स्क्रिप्ट बीजेपी मुख्यालय में लिखी गई है।’

हालांकि अरविंद केजरीवाल के जेल जाने की सूरत में किसी ‘प्लान बी’ की चर्चा से सौरभ भारद्वाज इंकार करते हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 45 पन्नो के ऑर्डर में मनीष सिसोदिया को 2 करोड़ रुपए और आम आदमी पार्टी को हवाला के जरिए 100 करोड़ रुपए मिलने की बात कहीं साबित होती दिखाई नहीं दे रही है। मामला कुल मिलाकर नई नीति से शराब कारोबारियों को हुए फायदे का है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में शराब कारोबारियों के कमीशन में इजाफे और 70 करोड़ के लाइसेंस फीस के मामले को गंभीर माना है। खास बात ये है कि अबतक आम आदमी पार्टी के नेता ये कहते रहे हैं कि नई शराब नीति से दिल्ली सरकार को राजस्व का कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन अब वो अपनी उन दलीलों से मुंह चुराते नजर आ रहे हैं।

उधर केजरीवाल की पसंदीदा मंत्री आतिशी सिंह बार बार कह रहीं हैं कि ईडी की पूछताछ के बाद केजरीवाल साहब गिरफ्तार हो सकते हैं। क्योंकि दो चुनावों में पटखनी खाने के बाद बीजेपी आम आदमी पार्टी को ही खत्म करना चाहती है। आतिशी सिंह का ये भी कहना है कि नई शराब नीति को पहले ही रद्द किया जा चुका है और केंद्रीय एजेंसियां, सीबीआई और ईडी केजरीवाल के खिलाफ शराब घोटाला मामले में पैसे के लेनदेन का अबतक कोई सबूत नहीं जुटा पाईं हैं। फिर केजरीवाल साहब को क्यों गिरफ्तार किया जाएगा? इस सवाल पर आतिशी कहती हैं, “उन्हें सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया जाएगा क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी उनसे डरते हैं। इसीलिए आम आदमी पार्टी के नेताओं को एक-एक कर जेल भेजा जा रहा है।” गौरतलब है की सीबीआई शराब घोटाला मामले में केजरीवाल से 16 अप्रैल 2023 को भी पूछताछ कर चुकी है।

उधर दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले के ना केवल लाभार्थी हैं बल्कि वो इसके आर्किटेक्ट और किंगपिन हैं। खुद को कट्टर ईमानदार कहने वाली पार्टी और सीएम केजरीवाल का चेहरा बेनकाब हो गया है। इस मामले में 338 करोड़ के घोटाले के सबूत होने की वजह से ही जेल में बंद इनके नेताओं को जमानत तक नहीं मिल पा रही है। केंद्र सरकार में मंत्री अनुराग ठाकुर तो कहते हैं आम आदमी पार्टी की सरकार में दिल्ली से लेकर पंजाब तक भ्रष्टाचार फैला है। यही वजह है कि सबको ईमानदारी का सर्टिफिकेट बांटने वाले केजरीवाल साहब का नंबर लग गया है। दिलचस्प ये है कि बीते सालों में केजरीवाल ने जिन नेताओं को कट्टर ईमानदार होने का सर्टिफिकेट बांटा था, शराब घोटाले में उनके जेल जाने के बाद उन्हें अबतक जमानत नहीं मिली।


राजनीतिक हलकों में आम चर्चा है कि केजरीवाल साहब को अब अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा है। इसीलिए वो भविष्य की तैयारी में जुट गए हैं। ईडी की पूछताछ से 24 घंटे पहले एमसीडी के 5000 कर्मचारियों की नौकरी पक्का करने के एलान को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। ताकि जेल जाने की सूरत में भी जनता की सहानुभूति उनके साथ बनी रहे। सवाल घुम फिरकर वहीं आ जाता है कि केजरीवाल अपनी खड़ाऊ किसे देकर जाएंगे। आतिशी सिंह, राघव चड्ढा, सौरभ भारद्वाज या फिर सुनीता केजरीवाल? आम आदमी पार्टो पर लंबे समय से नजर रखने वाले पत्रकारों की राय है कि केजरीवाल आतिशी सिंह को कमान सौंपेंगे। क्योंकि आतिशी केजरीवाल की सबसे भरोसेमंद है और दूसरे, वो सरकार को बेहतर तरीके से चला सकतीं हैं। वैसे राजनीति में कयासबाजी सबसे कठिन चीज है। केजरीवाल साहब को झूठ बोलने और अपनी बातों से पलटने की आदत रही है। ऐसे में वो आखिर में किस नाम पर मुहर लगाएंगे, फिलहाल ये कह पाना मुश्किल ही है।