Sunday, April 6, 2025
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146 सांसदों के निलंबन के खिलाफ विपक्ष का मार्च, संसद की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित

नई दिल्ली: विपक्ष की गैरमौजूदगी में लोकसभा और राज्यसभा में कई अहम बिलों को पारित कराने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर अहम बिल पास हुए। शीतकालीन सत्र की समाप्ति की घोषणा करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया कि इस सत्र में लोकसभा की उत्पादकता करीब 74 फीसदी रही। इस सत्र में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य बिल, दूरसंचार विधायक सहित 18 अहम बिल पारित किए गए। सदन की कार्यवाही में सहयोग के लिए स्पीकर ओम बिरला ने सभी सांसदों का आभार जताया।

Photo: Social Media

वहीं राज्यसभा में भी भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य बिल के पास होने के बाद राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बताया कि शीतकालीन सत्र की उत्पादकता करीब 79 फीसदी रही। इस दौरान डाकघर विधेयक, दूरसंचार विधेयक और चुनाव आयोग की नियुक्ति को लेकर अहम बिल पारित कराए गए। इस तरह शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में कुल 17 विधेयक पास कराए गए।

हालांकि संसद से विपक्षी सांसदों का निलंबन का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा। संसद के शीतकालीन सत्र के के आखिरी दिन लोकसभा में विपक्ष के 3 और सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया। आज लेकसभा अध्यक्ष ने जिन सांसदों को निलंबित किया उनके नाम हैं, कांग्रेस सांसद डी के सुरेश, नकुल नाथ और दीपक बैज। इन तीन सांसदों मिलाकर संसद से अबतक कुल 146 सांसद सस्पेंड किए जा चुके हैं।

सांसदों के निलंबन का सिलसिला 14 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब विपक्षी सांसद संसद पर आतंकी हमले की बरसी वाले दिन 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में सेंध के मामले में गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग की। 13 दिसंबर को सबसे पहले लोकसभा से 13 और राज्यसभा से 1 सांसद को निलंबित किया गया। इसके बाद तो सांसदों को निलंबित किए जाने की मानो झड़ी सी लग गई। और सदन के खत्म होते होते 146 लोकसभा और राज्यसभा से निलंबित कर दिए गए। सबसे ज्यादा कांग्रेस के दोनों सदनों को मिलाकर 60 सांसद निलंबित किए गए हैं। देश की आजादी के बाद पहली बार एक ही दिन में इतने सांसद निलंबित किए गए हैं।

इससे पहले गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष के सांसदों ने संसद से विजय चौक तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार संसद की सुरक्षा चूक पर जवाब दे। पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह संसद में आकर इस मामले पर बयान दें। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गृह मंत्री संसद की सुरक्षा में हुई चूक पर टीवी चैनलों पर बयान दे रहे हैं लेकिन सदन में आकर बयान देने की उन्हें फुर्सत नहीं है। ये संसद का घोर अपमान है।

उधर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी संसद से विपक्षी सांसदों के निलंबन को गैरवाजिब करार दिया है। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जानकारी दी कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने 146 सांसदों के निलंबन के खिलाफ 22 दिसंबर को सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का फैसला किया गया है। खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज को दबाने की भी तीखी आलोचना की और कहा कि जिस बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा की अनुशंसा पर संसद में कूदनेवालों सभी लड़कों के पास बनाए गए थे, उनसे ना तो कोई पूछताछ हुई है और ना ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।

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