Friday, April 4, 2025
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डॉ. राममनोहर लोहिया के निजी सचिव कमलेशजी ने सी आई ए का समर्थन किया था!

-अरविंद कुमार

नई दिल्ली। प्रख्यात समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के निजी सचिव एवं हिंदी के प्रसिद्ध कवि कमलेश जी ने सी आई ए का दो बार समर्थन किया था और बाद में लोहिया के आलोचक भी बन गए थे। वे हिंदी के सबसे पढ़ाकू और विद्वान लोगों में से थे लेकिन उनका व्यक्तित्व “विचित्र” और “रहस्यमयी” था। उनकी कविताओं में गहरी करुणा और संवेदना थी तथा वे अपनी तरह के अलग कवि थे। उन्होंने लिखा कम लेकिन जितना लिखा वह काफी महत्वपूर्ण था। पर उन्हें विस्मृत भी कर दिया गया। कमलेश जी पर रज़ा फॉउंडेशन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने यह बात कही।

Photo: delhinews24x7.com

हिंदी के प्रसिद्ध कवि अशोक वाजपेयी, गिरधर राठी, अरुण कमल और आलोचक मदन सोनी ने कल कमलेश जी के व्यक्त्वि और लेखन पर समग्र ढंग से विचार व्यक्त किये लेकिन अशोक वाजपेयी ने आश्चर्य की बात है कि नई पीढ़ी का कोई कवि, लेखक या लेखिका कमलेश जी को जानने या उनके बारे में सुनने के लिए समारोह में नहीं आया। प्रसिद्ध समाजवादी नेता एवं पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज की पत्रिक “प्रतिपक्ष” में कमलेश जी के सहयोगी एवम प्रसिद्ध कवि आलोचक गिरधर राठी ने कहा कि उन्होंने सागर में पहली बार अशोक वाजपेयी के मुख से कमलेश जी का नाम सुना था। वे अशोक सेक्सरिया के परम मित्र थे।

उन्होंने बताया कि और भारत भूषण अग्रवाल ने उन्हें कमलेश जी से मिलने की सलाह दी थी क्योंकि प्रतिपक्ष निकलने वाला था जिसके संपादक कमलेश जी बने थे। कमलेश जी ने मुझे सहायक संपादक रखा और उसमें मंगलेश डबराल असद ज़ैदी और संभवतः विष्णु खरे ने भी काम किया था। कमलेश जी ने कामकाज में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया। श्री राठी ने कहा कि कमलेश जी ने समवाय नामक पत्रिका निकाली थी और लोहिया के निजी सचिव थे। उनका संबंध उस ज़माने के बड़े समाजवादी नेताओं से था। लोहिया जी के लिए संसद में सवाल पूछने के लिए सवाल बनाने का काम वह किया करते थे। वे बड़ौदा डायनामाइट केस में गिरफ्तार हुए थे और लाल किले में उनको रखा गया था जहां पुलिस ने उनको बहुत ही शारीरिक यंत्रणा दी थी। लेकिन अशोक सेक्सरिया के शब्दों में बाद में कमलेश जी का “कायाकल्प” हो गया।

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कमलेश जी ने दो बार सी आई ए का समर्थन किया था। मिजोरम के मुख्यमंत्री के सलाहकार बन गए थे लेकिन यह भी सच है कि सी आई ए ने रूस के बारे में जो बातें कही थीं और रूस के के जी बी ने अमेरिका के बारे में जो बात कही, वह दोनों सच निकलीं। श्री राठी ने कहा कि कमलेश जी रूसी साहित्य के बड़े गहरी जानकार थे और उन्होंने उसके बारे में एक किताब भी लिखी थी। वे बहुत पढ़ाकू थे उनके जैसा पढ़ाकू मैंने हिंदी में किसी को नहीं देखा। लेकिन वह बातचीत में अपना ज्ञान कम ही प्रकट करते थे। वह लोहिया के महासचिव थे लेकिन उनका यह मानना था कि लोहिया सुविधा के कारण समाजवादी बने थे, अगर उसे समय कोई और वाद चल रहा होता तो वह समाजवादी नहीं बनते। कमलेश जी ने लिखा है कि लोहिया ने बाद में समाजवाद से खुद को किनारा भी कर लिया था।

 

श्रीराठी ने कहा कि कमलेश जी की कविता में सभ्यता विमर्श तो है तो आत्म धिक्कार और आत्मग्लानि भी है। उनका शब्द भंडार बहुत बड़ा था। वे गद्यकविता लिखते थे। उन्होंने कहानियां भी लिखीं। श्री अशोक वाजपेयी ने कहा कि कमलेश जी “कल्पना” के संपादक मंडल में थे। रघुवीर सहाय, प्रयाग शुक्ल भी उसमें थे। आज से करीब 50 वर्ष पूर्व पहचान सीरीज में मैंने उनको छापा था जो बाद में जरत्कारू नाम से पहले कविता संग्रह के रूप में छपा। उन्होंने कहा कि कमलेश जी बहुत विचित्र आदमी थे। कभी वे जहाज से लोहा का स्क्रैप किसी देश मे भेजते थे तो कभी उज्बेकिस्तान में होटल बनाने का काम करते थे। कभी मिज़ोरम के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार। वे मित्रों से पैसे उधार बहुत लेते थे और मित्रों पर खर्च करते थे। उन्होंने कहा कि कमलेश जी बहुत पढ़ाकू थे। दुनिया के बड़े से बड़े दार्शनिकों लेखकों की पहली किताब वे पढ़ चुके थे। मैंने तलाश के दो मुहावरे नाम से लेख लिखा था जिसमें धूमिल और कमलेश की कविताओं की चर्चा की थी।

श्री वाजपेयी ने कमलेश जी को पितृपक्ष का कवि बताते हुए कहा कि वे कविता में पितरों को याद करते थे लेकिन आज पितरों को याद करने का रिवाज कम हो गया है। समारोह में अरुण कमल और मदन सोनी ने कमलेश जी की कविताओं का गम्भीर विश्लेषण किया और उनकी कविताओं की खूबियां बतायीं। अरुणकमल ने कमलेश जी को विस्मृत किये जाने के कारण बताएं और जीवन तथा मृत्यु के द्वंद्व का कवि बताया। उन्होंने कहा कि कमलेश जी की कविता में रात और अंधेरे के बहुत बिम्ब आते हैं। उनकी कविता में पाषाण के नीचे दबी चिड़िया की चीख के रूप में बीसवीं सदी की चीख पुकार है। मदन सोनी ने उनकी कविता को बसाव और आवास का कवि बताया औऱ कहा कि उनकी कविता में जीवन मृत्यु का द्वंद्व भी है। उन्होंने कहा कि कमलेश जी समसामयिकता के कवि नहीं हैं पर उनकी कविता में इतिहास और राजनीति के सवाल हैं।

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