-अरविंद कुमार
नई दिल्ली। देश के सोलह प्रमुख छात्र संगठनों ने “यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया मोर्चा” गठित कर इसके के बैनर तले नई शिक्षा नीति को खारिज किया है और ‘भारत बचाओ भाजपा हटाओ’ का नारा दिया है। इन छात्र संगठनों के नेताओं ने आज यहां प्रेस क्लब में पत्रकार सम्मेलन में यह आह्वान किया और 8 सूत्री मांग भी रखी।
इस मौके पर कांग्रेस से जुड़ी एनएसयूआई, माकपा से जुडी एसएफआई, भाकपा से जुड़ी आईएसएफ, द्रमुक छात्र महासंघ, समाजवादी छात्र सभा, आदिवासी छात्र संघ के अलावा कई दूसरे छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने 12 जनवरी

को संसद की ओर मार्च करने तथा एक फरवरी को चेन्नई में रैली निकालने का भी फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि संघ परिवार द्वारा समर्थित भाजपा की सरकार ने शिक्षा प्रणाली को सांप्रदायिक बनाने का प्रयास किया है और इंडिया का नाम बदलने का काम शुरू कर दिया है। इन प्रतिनिधियों ने स्कूल कालेजों में बढ़ती फीस को नियंत्रित करने और बेरोजगारी को दूर करने के लिए भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून बनाने की बात कही।
इन छात्र संगठनों की साझा मांग है कि देश के सभी कैम्पस में छात्र संघों में जाति और आर्थिक आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए ‘रोहित कानून’ बनाया जाए। उन्होंने निजी क्षेत्रों में आरक्षण को लागू करने, कैम्पस में छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न को रोकने की भी मांग की।