अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए वर्ल्ड कप फाइनल के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को 6 विकेट से हरा कर छठी बार क्रिकेट विश्व विजेता बन गया है। इस मौके पर टीम इंडिया की हौसला आफजाई करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। लेकिन इन दो दिग्गज नेताओं की मौजूदगी और दर्शकों

में भारी जोश के बावजूद टीम इंडिया मैदान पर उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पाई जैसी की उनसे उम्मीद की जा रही है। इस उम्मीद की वजह ये थी कि टीम इंडिया ने क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में पहुंचने से पहले कोई मैच नहीं गंवाया था। और लगातार 10 मैच जीतकर फाइनल में पहुंची थी।
मैच में टीम इंडिया के 241 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी आस्ट्रेलियाई टीम को शुरूआत खराब रही। उसे एक के बाद एक तीन झटके लगे। जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम संभल गई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने 43 ओवरों में ही 4 विकेट के नुकसान पर 241 रन बनाकर वर्ल्ड कप जीत लिया। ऑस्ट्रेलिया की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाई बल्लेबाज ट्रेविस हेड ने। ट्रेविस हेड ने 120 गेंदों में 137 रनों की शानदार पारी खेली और मैदान में चौक्को और छक्को की बरसात कर दी। आज टीम इंडिया की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फिल्डिंग बेहद औसत दर्जे की रही।

इससे पहले टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया महज 240 रनों में ही सिमट गई। टीम इंडिया के लिए सबसे ज्यादा 66 रन के एल राहुल ने बनाए। वहीं विराट कोहली ने 54 रनों की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया के लिए मिचेल स्टार्क ने 3 विकेट लिए जबकि पैट कमिंस और जोश हेजलवुड ने 2-2 विकेट हासिल किए। भारत के टारगेट का पीछा करते हुए ऑस्ट्रलियाई टीम ने 47 रनों पर ही अपने तीन बड़े विकेट खो दिए थे। लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाज बेअसर साबित हए। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह ने दो और सिराज और मोहम्मद शमी ने एक-एक विकेट लिए। शुरूआती 3 विकेट चटखाने के बाद भारतीय गेंदबाज पूरे मैच में विकेट के लिए तरसते रहे।
बल्लेबाज ट्रेविस हेड को उनके शानदार शतक के लिए प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड दिया गया। वहीं विश्व कप टूर्नामेंट में 96 रनों के औसत से 765 रन बनाने वाले टीम इंडिया के बल्लेबाज विराट कोहली को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया। छठी पर विश्व कप ट्राफी पर कब्जा जमाने से पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1987, 19993, 1999, 2007 और 2015 में भी विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। जबकि टीम इंडिया के पास विश्व कप जीतने का ये तीसरा मौका था। इससे पहले टीम इंडिया ने कपिलदेव और धोनी के नेतृत्व में 1983 और 2011 में विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था।